अधिकांश लोग यह मानते हैं कि फेफड़ों की कमजोरी का असर केवल सांस पर पड़ता है। लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अधिक गंभीर है।
जब फेफड़े पर्याप्त ऑक्सीजन शरीर तक नहीं पहुँचा पाते, तो शरीर का हर अंग प्रभावित होने लगता है।
ऑक्सीजन शरीर की ऊर्जा का मूल स्रोत है। यदि इसकी आपूर्ति कम हो जाए तो:
फेफड़ों की कमजोरी वाले लोग अक्सर गतिविधि कम कर देते हैं। वे सोचते हैं कि आराम करने से समस्या कम होगी।
लेकिन कम गतिविधि से मांसपेशियाँ और कमजोर होती हैं। और फिर थोड़ी गतिविधि भी भारी लगने लगती है।
यह एक दुष्चक्र बन जाता है:
फेफड़ों की कार्यक्षमता कम होने पर दिल को अधिक प्रयास करना पड़ता है। समय के साथ यह दिल की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है।
यदि सांस फूलना लंबे समय से है तो कोविड के बाद फेफड़ों की कमजोरी और COPD और अस्थमा में फेफड़ों की समस्या ब्लॉग भी पढ़ें।
हाँ — फेफड़ों की कार्य क्षमता प्रशिक्षण से सुधारी जा सकती है। इसे पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन कहा जाता है।
यदि आपकी शारीरिक क्षमता धीरे-धीरे कम हो रही है, तो यह केवल उम्र नहीं भी हो सकती।
फेफड़ों की कमजोरी या सांस फूलने की स्थिति में कार्य क्षमता का मूल्यांकन आवश्यक है।
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