COPD और अस्थमा: धीरे-धीरे खराब होते फेफड़ों को कैसे पहचानें

बहुत से लोग यह मानते हैं कि सांस फूलना सिर्फ उम्र, कमजोरी या मौसम का असर है। लेकिन सच यह है कि COPD और अस्थमा जैसी बीमारियाँ धीरे-धीरे फेफड़ों को खराब करती रहती हैं।

मरीज को तब तक पता नहीं चलता जब तक नुकसान काफी बढ़ न जाए। यही कारण है कि कई लोग अचानक महसूस करते हैं कि उनकी क्षमता पहले जैसी नहीं रही।

COPD और अस्थमा में असली समस्या क्या होती है

इन बीमारियों में फेफड़ों के अंदर हवा आने-जाने का रास्ता संकरा हो जाता है। समय के साथ हवा पूरी तरह बाहर नहीं निकलती और फेफड़ों में पुरानी हवा फंसी रहती है।

इससे ऑक्सीजन का आदान-प्रदान घटता जाता है और मरीज को लगता है कि सांस पूरी नहीं भर रही।

धीरे-धीरे होने वाला नुकसान

खतरनाक संकेत जिन्हें नजरअंदाज न करें

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क्या सुधार संभव है

फेफड़ों की संरचना पूरी तरह वापस नहीं आती, लेकिन सही श्वसन प्रशिक्षण और पल्मोनरी रिहैब से कार्य क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार संभव है।

पल्मोनरी रिहैब क्यों जरूरी है

यदि आपको COPD, अस्थमा या सांस फूलने की समस्या है तो फेफड़ों की कार्य क्षमता का मूल्यांकन आवश्यक है।

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Author:
Dr. Rahul Khan PT
Founder, JPCRI, Raja Park