बहुत से लोग कोविड संक्रमण के बाद यह महसूस करते हैं कि उनकी सांस पहले जैसी नहीं रही। हल्की चाल में थकान, सीढ़ियाँ चढ़ने में कठिनाई और गहरी सांस न भर पाने का अनुभव आम है।
अधिकांश लोग इसे कमजोरी या समय का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि कोविड फेफड़ों की कार्यक्षमता को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है।
संक्रमण के दौरान फेफड़ों के अंदर सूजन और माइक्रो-डैमेज हो सकता है। कई मामलों में यह सूजन ठीक होने के बाद भी पूरी तरह समाप्त नहीं होती।
इसके कारण:
यदि सांस फूलना लगातार बना हुआ है तो सांस फूलना सामान्य नहीं है और COPD और अस्थमा में फेफड़ों की कमजोरी ब्लॉग भी पढ़ें।
लोग आराम करते रहते हैं और गतिविधि कम कर देते हैं। लेकिन निष्क्रियता से फेफड़े और मांसपेशियाँ दोनों कमजोर होती जाती हैं।
समय के साथ यह सांस फूलने को और बढ़ा देती है।
हाँ — सही प्रशिक्षण से फेफड़ों की कार्य क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार हो सकता है। इसे पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन कहा जाता है।
यदि कोविड के बाद आपकी क्षमता पहले जैसी नहीं रही, तो इसे सामान्य मानकर अनदेखा न करें।
पोस्ट-कोविड सांस फूलना या कमजोरी होने पर फेफड़ों की कार्य क्षमता का मूल्यांकन आवश्यक है।
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