पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन क्या है और सांस की बीमारी में क्यों जरूरी है

सांस फूलना, फेफड़ों की कमजोरी और शारीरिक क्षमता में कमी — ये केवल बीमारी के लक्षण नहीं हैं, बल्कि शरीर की कार्यक्षमता के घटने के संकेत हैं।

अधिकांश लोग दवा लेते रहते हैं, लेकिन फेफड़ों की कार्य क्षमता को सुधारने पर ध्यान नहीं देते। यहीं से समस्या बनी रहती है।

पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन क्या है

पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन फेफड़ों, श्वसन मांसपेशियों और शरीर की सहनशक्ति को सुधारने की वैज्ञानिक प्रक्रिया है।

इसमें शामिल होते हैं:

किन लोगों को इसकी आवश्यकता होती है

यदि आपको सांस की समस्या है तो सांस फूलना सामान्य नहीं है, COPD और अस्थमा में फेफड़ों की कमजोरी और कोविड के बाद फेफड़ों की समस्या ब्लॉग भी पढ़ें।

पल्मोनरी रिहैब क्यों जरूरी है

फेफड़ों की बीमारी में मुख्य समस्या केवल संरचना नहीं होती, बल्कि कार्यक्षमता होती है।

यदि व्यक्ति गतिविधि कम करता है, तो मांसपेशियाँ कमजोर होती हैं, सहनशक्ति घटती है, और सांस फूलना बढ़ता है।

यही कारण है कि केवल दवा पर्याप्त नहीं होती।

वैज्ञानिक रूप से सिद्ध लाभ

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य

फेफड़ों की क्षमता का प्रशिक्षण संभव है। लेकिन इसके लिए सही मूल्यांकन और निर्देशित कार्यक्रम आवश्यक है।

यदि सांस फूलना या क्षमता में कमी लंबे समय से है, तो इसे सामान्य मानना उचित नहीं।

सांस फूलना या फेफड़ों की कमजोरी की स्थिति में पल्मोनरी कार्य क्षमता का मूल्यांकन आवश्यक है।

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Author:
Dr. Rahul Khan PT
Founder, JPCRI, Raja Park